संग्रह

ये कलाकृतियाँ जिन लोगों के संग्रह में हैं ;


मेरा यह चित्र "राम-कृष्ण-शिव" जिसे मैं लोहिया के पढ़ने के बाद बनाया था और उन की अवधारणा थी कि यह हमारे देश के सांस्कृतिक स्वरूप है जिसे हमने भगवान बना रखा है । और आप देख पा रहे होंगे कि इनके कैरेक्टरिस्टिक को मैंने रंगों के माध्यम से दर्शाने की कोशिश की है जिसमें मेरी तत्कालीन कला समझ मैं प्रेरित किया था कि मैं उन्हें चुन चित्रित करूं।
कालांतर में समाजवाद के स्वरूप को देख कर लिया भैया का समाजवाद तिरोहित हो गया और नए समाजवाद की अवधारणा से निहायत नफरत और मैंने फिर अपने चित्रों की दिशा गांव की ओर मोड़ दी थी दोबारा समाजवाद की तरफ मुड़ के भी नहीं देखा? जिस के क्या कारण हैं उसका उल्लेख यहां आवश्यक नहीं है!
जिस तरह से इनकी भगवान होने की अवधारणा चल रही है उससे काफी तरह से सामाजिक स्वरूपों में घालमेल मिला जो बिल्कुल इस तरह के चित्रों से विमुख कर दिया।
मेरा यह चित्र उन दिनों के मेरे कला कार्य का एक प्रचलित शैली का चित्र है जिसे भारत सरकार के पर्यटन विभाग में किसी महत्वपूर्ण स्थान पर लगा रखा है जिसे हम अब कई बार विशिष्ट अतिथियों के आगमन पर अखबारों में छपी उनकी तस्वीर के पृष्ठ भाग में देख पाते हैं।
यह कितनी विडंबना की बात है कि जिससे मैंने रचा है उसकी सूचना भी मुझे ठीक से नहीं है अब वह कहां है।
मेरे चित्रों की पहली सरकारी खरीद जिसे भारतीय पर्यटन निगम ने लिया। 

                               
  निजी संग्रह लन्दन 


श्रीमती मुनिया /संदीप 

श्रीमती मुनिया /संदीप

श्रीमती मुनिया /संदीप

श्रीमती मुनिया /संदीप

श्रीमती मुनिया /संदीप

श्रीमती मुनिया /संदीप

श्रीमती मुनिया /संदीप

श्रीमती मुनिया /संदीप

शंकर नेत्रालय चेन्नई 


फाईन आर्ट नॉएडा में 

बीरबहादुर यादव के संग्रह में 

डॉ.माही सिंह कैनाडा  

ओम प्रकाश वर्मा गाजियाबाद 

श्री सुरेश कुमार यादव ,नॉएडा 

डॉ.संजय सिंह , नई  दिल्ली 

डॉ.संजय सिंह , नई  दिल्ली 

डॉ.संजय सिंह , नई  दिल्ली 

डॉ.संजय सिंह , नई  दिल्ली 

डॉ.संजय सिंह , नई  दिल्ली 


एंड्रे  आस्ट्रेलिया 

अतुल गर्ग ,गाजियाबाद 

वी अग्रवाल , देहरादून 

चौ.बलवंत सिंह नई दिल्ली 



































जीनोम कलवारी जौनपुर 
नई दिल्ली 
 निजी संग्रह में 1996 ललित कला अकादमी से 

निजी संग्रह में 1996 ललित कला अकादमी से 


निजी संग्रह में 1991  बम्बई के ललित कला अकादमी के कला मेले के बाद  

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